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ऋग्वेद 5.53.12
॥कस्मा॑ अ॒द्य सुजा॑ताय रा॒तह॑व्याय॒ प्र य॑युः ।ए॒ना यामे॑न म॒रुत॑:॥
||kasmā adya sujātāya rātahavyāya pra yayuḥ |enā yāmena maruta: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें॥कस्मा॑ अ॒द्य सुजा॑ताय रा॒तह॑व्याय॒ प्र य॑युः ।ए॒ना यामे॑न म॒रुत॑:॥
||kasmā adya sujātāya rātahavyāya pra yayuḥ |enā yāmena maruta: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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