ऋग्वेद 6.15.17
इ॒ममु॒ त्यम॑थर्व॒वद॒ग्निं म॑न्थन्ति वे॒धस॑: ।यम॑ङ्कू॒यन्त॒मान॑य॒न्नमू॑रं श्या॒व्या॑भ्यः॥
imamu tyamatharvavadagniṃ manthanti vedhasa: |yamaṅkūyantamānayannamūraṃ śyāvyābhyaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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