ऋग्वेद 6.16.22प्र व॑: सखायो अ॒ग्नये॒ स्तोमं॑ य॒ज्ञं च॑ धृष्णु॒या ।अर्च॒ गाय॑ च वे॒धसे॑॥pra va: sakhāyo agnaye stomaṃ yajñaṃ ca dhṛṣṇuyā |arca gāya ca vedhase ||इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें