ऋग्वेद 7.96.2
उ॒भे यत्ते॑ महि॒ना शु॑भ्रे॒ अन्ध॑सी अधिक्षि॒यन्ति॑ पू॒रव॑: ।सा नो॑ बोध्यवि॒त्री म॒रुत्स॑खा॒ चोद॒ राधो॑ म॒घोना॑म्॥
ubhe yatte mahinā śubhre andhasī adhikṣiyanti pūrava: |sā no bodhyavitrī marutsakhā coda rādho maghonām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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