ऋग्वेद 8.1.22
शेवा॑रे॒ वार्या॑ पु॒रु दे॒वो मर्ता॑य दा॒शुषे॑ ।स सु॑न्व॒ते च॑ स्तुव॒ते च॑ रासते वि॒श्वगू॑र्तो अरिष्टु॒तः॥
śevāre vāryā puru devo martāya dāśuṣe |sa sunvate ca stuvate ca rāsate viśvagūrto ariṣṭutaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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