ऋग्वेद 8.1.9
ये ते॒ सन्ति॑ दश॒ग्विन॑: श॒तिनो॒ ये स॑ह॒स्रिण॑: ।अश्वा॑सो॒ ये ते॒ वृष॑णो रघु॒द्रुव॒स्तेभि॑र्न॒स्तूय॒मा ग॑हि॥
ye te santi daśagvina: śatino ye sahasriṇa: |aśvāso ye te vṛṣaṇo raghudruvastebhirnastūyamā gahi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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