ऋग्वेद 8.101.13
इ॒यं या नीच्य॒र्किणी॑ रू॒पा रोहि॑ण्या कृ॒ता ।चि॒त्रेव॒ प्रत्य॑दर्श्याय॒त्य१न्तर्द॒शसु॑ बा॒हुषु॑॥
iyaṃ yā nīcyarkiṇī rūpā rohiṇyā kṛtā |citreva pratyadarśyāyatya1ntardaśasu bāhuṣu ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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