ऋग्वेद 8.13.26
इन्द्र॒ त्वम॑वि॒तेद॑सी॒त्था स्तु॑व॒तो अ॑द्रिवः ।ऋ॒तादि॑यर्मि ते॒ धियं॑ मनो॒युज॑म्॥
indra tvamavitedasītthā stuvato adrivaḥ |ṛtādiyarmi te dhiyaṃ manoyujam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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