ऋग्वेद 8.19.33
यस्य॑ ते अग्ने अ॒न्ये अ॒ग्नय॑ उप॒क्षितो॑ व॒या इ॑व ।विपो॒ न द्यु॒म्ना नि यु॑वे॒ जना॑नां॒ तव॑ क्ष॒त्राणि॑ व॒र्धय॑न्॥
yasya te agne anye agnaya upakṣito vayā iva |vipo na dyumnā ni yuve janānāṃ tava kṣatrāṇi vardhayan ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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