ऋग्वेद 8.23.19
इ॒मं घा॑ वी॒रो अ॒मृतं॑ दू॒तं कृ॑ण्वीत॒ मर्त्य॑: ।पा॒व॒कं कृ॒ष्णव॑र्तनिं॒ विहा॑यसम्॥
imaṃ ghā vīro amṛtaṃ dūtaṃ kṛṇvīta martya: |pāvakaṃ kṛṣṇavartaniṃ vihāyasam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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