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ऋग्वेद 8.32.15
नकि॑रस्य॒ शची॑नां निय॒न्ता सू॒नृता॑नाम् ।नकि॑र्व॒क्ता न दा॒दिति॑॥
nakirasya śacīnāṃ niyantā sūnṛtānām |nakirvaktā na dāditi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंनकि॑रस्य॒ शची॑नां निय॒न्ता सू॒नृता॑नाम् ।नकि॑र्व॒क्ता न दा॒दिति॑॥
nakirasya śacīnāṃ niyantā sūnṛtānām |nakirvaktā na dāditi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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