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ऋग्वेद 8.32.30
अ॒र्वाञ्चं॑ त्वा पुरुष्टुत प्रि॒यमे॑धस्तुता॒ हरी॑ ।सो॒म॒पेया॑य वक्षतः॥
arvāñcaṃ tvā puruṣṭuta priyamedhastutā harī |somapeyāya vakṣataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंअ॒र्वाञ्चं॑ त्वा पुरुष्टुत प्रि॒यमे॑धस्तुता॒ हरी॑ ।सो॒म॒पेया॑य वक्षतः॥
arvāñcaṃ tvā puruṣṭuta priyamedhastutā harī |somapeyāya vakṣataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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