ऋग्वेद 8.46.11
न॒हि ते॑ शूर॒ राध॒सोऽन्तं॑ वि॒न्दामि॑ स॒त्रा ।द॒श॒स्या नो॑ मघव॒न्नू चि॑दद्रिवो॒ धियो॒ वाजे॑भिराविथ॥
nahi te śūra rādhaso'ntaṃ vindāmi satrā |daśasyā no maghavannū cidadrivo dhiyo vājebhirāvitha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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