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ऋग्वेद 8.46.15
द॒दी रेक्ण॑स्त॒न्वे॑ द॒दिर्वसु॑ द॒दिर्वाजे॑षु पुरुहूत वा॒जिन॑म् ।नू॒नमथ॑॥
dadī rekṇastanve dadirvasu dadirvājeṣu puruhūta vājinam |nūnamatha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंद॒दी रेक्ण॑स्त॒न्वे॑ द॒दिर्वसु॑ द॒दिर्वाजे॑षु पुरुहूत वा॒जिन॑म् ।नू॒नमथ॑॥
dadī rekṇastanve dadirvasu dadirvājeṣu puruhūta vājinam |nūnamatha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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