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ऋग्वेद 8.6.13
यद॑स्य म॒न्युरध्व॑नी॒द्वि वृ॒त्रं प॑र्व॒शो रु॒जन् ।अ॒पः स॑मु॒द्रमैर॑यत्॥
yadasya manyuradhvanīdvi vṛtraṃ parvaśo rujan |apaḥ samudramairayat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंयद॑स्य म॒न्युरध्व॑नी॒द्वि वृ॒त्रं प॑र्व॒शो रु॒जन् ।अ॒पः स॑मु॒द्रमैर॑यत्॥
yadasya manyuradhvanīdvi vṛtraṃ parvaśo rujan |apaḥ samudramairayat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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