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ऋग्वेद 8.6.15
न द्याव॒ इन्द्र॒मोज॑सा॒ नान्तरि॑क्षाणि व॒ज्रिण॑म् ।न वि॑व्यचन्त॒ भूम॑यः॥
na dyāva indramojasā nāntarikṣāṇi vajriṇam |na vivyacanta bhūmayaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंन द्याव॒ इन्द्र॒मोज॑सा॒ नान्तरि॑क्षाणि व॒ज्रिण॑म् ।न वि॑व्यचन्त॒ भूम॑यः॥
na dyāva indramojasā nāntarikṣāṇi vajriṇam |na vivyacanta bhūmayaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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