ऋग्वेद 8.73.15मा नो॒ गव्ये॑भि॒रश्व्यै॑: स॒हस्रे॑भि॒रति॑ ख्यतम् ।अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑:॥mā no gavyebhiraśvyai: sahasrebhirati khyatam |anti ṣadbhūtu vāmava: ||इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें