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ऋग्वेद 8.92.15
स नो॑ वृष॒न्त्सनि॑ष्ठया॒ सं घो॒रया॑ द्रवि॒त्न्वा ।धि॒यावि॑ड्ढि॒ पुरं॑ध्या॥
sa no vṛṣantsaniṣṭhayā saṃ ghorayā dravitnvā |dhiyāviḍḍhi puraṃdhyā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंस नो॑ वृष॒न्त्सनि॑ष्ठया॒ सं घो॒रया॑ द्रवि॒त्न्वा ।धि॒यावि॑ड्ढि॒ पुरं॑ध्या॥
sa no vṛṣantsaniṣṭhayā saṃ ghorayā dravitnvā |dhiyāviḍḍhi puraṃdhyā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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