ऋग्वेद 8.97.12
ने॒मिं न॑मन्ति॒ चक्ष॑सा मे॒षं विप्रा॑ अभि॒स्वरा॑ ।सु॒दी॒तयो॑ वो अ॒द्रुहोऽपि॒ कर्णे॑ तर॒स्विन॒: समृक्व॑भिः॥
nemiṃ namanti cakṣasā meṣaṃ viprā abhisvarā |sudītayo vo adruho'pi karṇe tarasvina: samṛkvabhiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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