ऋग्वेद 9.110.12
स प॑वस्व॒ सह॑मानः पृत॒न्यून्त्सेध॒न्रक्षां॒स्यप॑ दु॒र्गहा॑णि ।स्वा॒यु॒धः सा॑स॒ह्वान्त्सो॑म॒ शत्रू॑न्॥
sa pavasva sahamānaḥ pṛtanyūntsedhanrakṣāṃsyapa durgahāṇi |svāyudhaḥ sāsahvāntsoma śatrūn ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें