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ऋग्वेद 9.61.26
म॒हो नो॑ रा॒य आ भ॑र॒ पव॑मान ज॒ही मृध॑: ।रास्वे॑न्दो वी॒रव॒द्यश॑:॥
maho no rāya ā bhara pavamāna jahī mṛdha: |rāsvendo vīravadyaśa: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंम॒हो नो॑ रा॒य आ भ॑र॒ पव॑मान ज॒ही मृध॑: ।रास्वे॑न्दो वी॒रव॒द्यश॑:॥
maho no rāya ā bhara pavamāna jahī mṛdha: |rāsvendo vīravadyaśa: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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