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ऋग्वेद 9.63.14
ए॒ते धामा॒न्यार्या॑ शु॒क्रा ऋ॒तस्य॒ धार॑या ।वाजं॒ गोम॑न्तमक्षरन्॥
ete dhāmānyāryā śukrā ṛtasya dhārayā |vājaṃ gomantamakṣaran ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंए॒ते धामा॒न्यार्या॑ शु॒क्रा ऋ॒तस्य॒ धार॑या ।वाजं॒ गोम॑न्तमक्षरन्॥
ete dhāmānyāryā śukrā ṛtasya dhārayā |vājaṃ gomantamakṣaran ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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