ऋग्वेद 9.86.15
सो अ॑स्य वि॒शे महि॒ शर्म॑ यच्छति॒ यो अ॑स्य॒ धाम॑ प्रथ॒मं व्या॑न॒शे ।प॒दं यद॑स्य पर॒मे व्यो॑म॒न्यतो॒ विश्वा॑ अ॒भि सं या॑ति सं॒यत॑:॥
so asya viśe mahi śarma yacchati yo asya dhāma prathamaṃ vyānaśe |padaṃ yadasya parame vyomanyato viśvā abhi saṃ yāti saṃyata: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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