वाल्मीकि रामायण 1.1.15
सर्व शास्त्र अर्थ तत्त्वज्ञो स्मृतिमान् प्रतिभानवान् ।सर्वलोक प्रियः साधुः अदीनाअत्मा विचक्षणः॥
sarva śāstra artha tattvajño smṛtimān pratibhānavān |sarvaloka priyaḥ sādhuḥ adīnāatmā vicakṣaṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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