वाल्मीकि रामायण 1.1.20
ज्येष्टम् श्रेष्ट गुणैः युक्तम् प्रियम् दशरथः सुतम् ।प्रकृतीनाम् हितैः युक्तम् प्रकृति प्रिय काम्यया॥
jyeṣṭam śreṣṭa guṇaiḥ yuktam priyam daśarathaḥ sutam |prakṛtīnām hitaiḥ yuktam prakṛti priya kāmyayā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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