वाल्मीकि रामायण 1.1.55
मार्गमाणो वने सीताम् राक्षसम् संददर्श ह ।कबंधम् नाम रूपेण विकृतम् घोर दर्शनम्॥
mārgamāṇo vane sītām rākṣasam saṃdadarśa ha |kabaṃdham nāma rūpeṇa vikṛtam ghora darśanam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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