वाल्मीकि रामायण 1.1.73
तत्र लंकाम् समासाद्य पुरीम् रावण पालिताम् ।ददर्श सीताम् ध्यायन्तीम् अशोक वनिकाम् गताम्॥
tatra laṃkām samāsādya purīm rāvaṇa pālitām |dadarśa sītām dhyāyantīm aśoka vanikām gatām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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