वाल्मीकि रामायण 1.13.15
न च अवज्ञा प्रयोक्तव्या काम क्रोध वशात् अपि ।यज्ञ कर्मसु ये व्यग्राः पुरुषाः शिल्पिनः तथा॥
na ca avajñā prayoktavyā kāma krodha vaśāt api |yajña karmasu ye vyagrāḥ puruṣāḥ śilpinaḥ tathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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