वाल्मीकि रामायण 1.13.19
यथोक्तम् तत् करिष्यामो न किंचित् परिहीयते ।ततः सुमंत्रम् आहूय वसिष्ठो वाक्यम् अब्रवीत्॥
yathoktam tat kariṣyāmo na kiṃcit parihīyate |tataḥ sumaṃtram āhūya vasiṣṭho vākyam abravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें