वाल्मीकि रामायण 1.13.35
बहूनि रत्नानि आदाय राज्ञो दशरथस्य ह ।ततो वसिष्ठः सुप्रीतो राजानम् इदम् अब्रवीत्॥
bahūni ratnāni ādāya rājño daśarathasya ha |tato vasiṣṭhaḥ suprīto rājānam idam abravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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