वाल्मीकि रामायण 1.13.38
सर्वकामैः उपहृतैः उपेतम् वै समन्ततः ।द्रष्टुम् अर्हसि राजेन्द्र मनसेव विनिर्मितम्॥
sarvakāmaiḥ upahṛtaiḥ upetam vai samantataḥ |draṣṭum arhasi rājendra manaseva vinirmitam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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