वाल्मीकि रामायण 1.13.40
ततो वसिष्ठ प्रमुखाः सर्व एव द्विजोत्तमाः ।ऋष्यशृन्गम् पुरस्कृत्य यज्ञ कर्म आरभन् तदा॥
tato vasiṣṭha pramukhāḥ sarva eva dvijottamāḥ |ṛṣyaśṛngam puraskṛtya yajña karma ārabhan tadā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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