वाल्मीकि रामायण 1.16.15
दिव्य पायस संपूर्णाम् पात्रीम् पत्नीम् इव प्रियाम् ।प्रगृह्य विपुलाम् दोर्भ्याम् स्वयम् मायामयीम् इव॥
divya pāyasa saṃpūrṇām pātrīm patnīm iva priyām |pragṛhya vipulām dorbhyām svayam māyāmayīm iva ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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