वाल्मीकि रामायण 1.18.11
विष्णोः अर्धम् महाभागम् पुत्रम् ऐक्ष्वाकु नंदनम् ।लोहिताक्षम् महाबाहुम् रक्त ओष्टम् दुंदुभि स्वनम्॥
viṣṇoḥ ardham mahābhāgam putram aikṣvāku naṃdanam |lohitākṣam mahābāhum rakta oṣṭam duṃdubhi svanam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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