वाल्मीकि रामायण 1.18.41
संभ्रान्त मनसः सर्वे तेन वाक्येन चोदिताः ।ते गत्वा राज भवनम् विश्वामित्रम् ऋषिम् तदा॥
saṃbhrānta manasaḥ sarve tena vākyena coditāḥ |te gatvā rāja bhavanam viśvāmitram ṛṣim tadā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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