वाल्मीकि रामायण 1.18.45
कुशलम् च अव्ययम् च एव पर्य पृच्छत् नराधिपम् ।पुरे कोशे जनपदे बान्धवेषु सुहृत्सु च॥
kuśalam ca avyayam ca eva parya pṛcchat narādhipam |pure kośe janapade bāndhaveṣu suhṛtsu ca ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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