वाल्मीकि रामायण 1.18.46
कुशलम् कौशिको राज्ञः पर्यपृच्छत् सुधार्मिकः ।अपि ते संनताः सर्वे सामंत रिपवो जिताः॥
kuśalam kauśiko rājñaḥ paryapṛcchat sudhārmikaḥ |api te saṃnatāḥ sarve sāmaṃta ripavo jitāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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