वाल्मीकि रामायण 1.18.7
एवम् विसृज्य तान् सर्वान् राजा संपूर्ण मानसः ।उवास सुखितः तत्र पुत्र उत्पत्तिम् विचिंतयन्॥
evam visṛjya tān sarvān rājā saṃpūrṇa mānasaḥ |uvāsa sukhitaḥ tatra putra utpattim viciṃtayan ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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