वाल्मीकि रामायण 1.19.15
वसिष्ठोऽपि महातेजा ये च इमे तपसि स्थिताः ।यदि ते धर्म लाभम् तु यशः च परमम् भुवि॥
vasiṣṭho'pi mahātejā ye ca ime tapasi sthitāḥ |yadi te dharma lābham tu yaśaḥ ca paramam bhuvi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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