वाल्मीकि रामायण 1.20.8
न च असौ रक्षसा योग्यः कूट युद्धा हि राक्षसा ।विप्रयुक्तो हि रामेण मुहूर्तम् अपि न उत्सहे॥
na ca asau rakṣasā yogyaḥ kūṭa yuddhā hi rākṣasā |viprayukto hi rāmeṇa muhūrtam api na utsahe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें