वाल्मीकि रामायण 1.21.1
तत् श्रुत्वा वचनम् तस्य स्नेह पर्याकुलाक्षरम् ।समन्युः कौशिको वाक्यम् प्रति उवाच महीपतिम्॥
tat śrutvā vacanam tasya sneha paryākulākṣaram |samanyuḥ kauśiko vākyam prati uvāca mahīpatim ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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