वाल्मीकि रामायण 1.21.12
न देवा न ऋषयः के चित् न अमरा न च राक्षसाः ।गन्धर्व यक्ष प्रवराः स किन्नर महोरगाः॥
na devā na ṛṣayaḥ ke cit na amarā na ca rākṣasāḥ |gandharva yakṣa pravarāḥ sa kinnara mahoragāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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