वाल्मीकि रामायण 1.22.15
न सौभाग्ये न दाक्षिण्ये न ज्ञाने बुद्धि निश्चये ।न उत्तरे प्रति वक्तव्ये समो लोके तव अनघ॥
na saubhāgye na dākṣiṇye na jñāne buddhi niścaye |na uttare prati vaktavye samo loke tava anagha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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