वाल्मीकि रामायण 1.26.2
पितुर् वचन निर्देशात् पितुर् वचन गौरवात् ।वचनम् कौशिकस्य इति कर्तव्यम् अविशङ्कया॥
pitur vacana nirdeśāt pitur vacana gauravāt |vacanam kauśikasya iti kartavyam aviśaṅkayā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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