वाल्मीकि रामायण 1.26.32
विश्वामित्रम् पूजयन् ततः संध्या प्रवर्तते ।ततो मुनिवरः प्रीतः ताटका वध तोषितः॥
viśvāmitram pūjayan tataḥ saṃdhyā pravartate |tato munivaraḥ prītaḥ tāṭakā vadha toṣitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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