वाल्मीकि रामायण 1.26.4
सोऽहम् पितुर्वचः श्रुत्वा शासनाद् ब्रह्म वादिनः ।करिष्यामि न संदेहः ताटका वधम् उत्तमम्॥
so'ham piturvacaḥ śrutvā śāsanād brahma vādinaḥ |kariṣyāmi na saṃdehaḥ tāṭakā vadham uttamam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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