वाल्मीकि रामायण 1.28.2
गृहीत अस्त्रो अस्मि भगवन् दुराधर्षः सुरैः अपि ।अस्त्राणाम् तु अहम् इच्छामि संहारम् मुनिपुंगव॥
gṛhīta astro asmi bhagavan durādharṣaḥ suraiḥ api |astrāṇām tu aham icchāmi saṃhāram munipuṃgava ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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