वाल्मीकि रामायण 1.30.18
स तेन परमास्त्रेण मानवेन समाहितः ।संपूर्णम् योजन शतम् क्षिप्तः सागर संप्लवे॥
sa tena paramāstreṇa mānavena samāhitaḥ |saṃpūrṇam yojana śatam kṣiptaḥ sāgara saṃplave ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें