वाल्मीकि रामायण 1.30.20
पश्य लक्ष्मण शीतेषुम् मानवम् मनु संहितम् ।मोहयित्वा नयति एनम् न च प्राणैर् व्ययुज्यत॥
paśya lakṣmaṇa śīteṣum mānavam manu saṃhitam |mohayitvā nayati enam na ca prāṇair vyayujyata ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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