वाल्मीकि रामायण 1.30.2
भगवन् श्रोतुम् इच्छावो यस्मिन् काले निशाचरौ ।संरक्षणीयौ तौ ब्रूहि न अतिवर्तेत तत् क्षणम्॥
bhagavan śrotum icchāvo yasmin kāle niśācarau |saṃrakṣaṇīyau tau brūhi na ativarteta tat kṣaṇam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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